ये ब्लॉग मेरे लिए कमल भाई ने बनाया और मुझे इन्सिस्ट किया की मुझे लिखना ही है, पर लिखना तो एक आर्ट है। रियाज़ करके ही सीख पाऊंगा। लिखने की हिम्मत जुटा रहा हूँ।
दर-असल मैं एक आवारा आदमी हूँ। घूमता ही रहता हूँ, लोगों से मिलता हूँ, नई जगह देखता हूँ, नये लोगों से मिलता हूँ, उनसे जीना सीखता हूँ। अब मैं अपनी दुनिया बढ़ाना चाहता हूँ। शायद यह ब्लॉगिंग मेरी दुनिया विस्तृत कर दे।
देखते हैं कितने नये दोस्त मिलते हैं।
कमल, इस बार घर से ही.
आड़ू-बेडू-घिंघारु परिषद उत्तराखण्ड के ब्लाग नैटवर्क में आपका स्वागत कर रही ठैरी बल हो पैं।
कमल जी हमें आपकी लेखनी से निकलने वाले ब्लाग्स का इन्तजार है.
क्या बात कर रहे हैं कमल जी, हम आपकी लेखनी से लिखे ‘बोर बलड़ा- भऱकाण्डे से…!’ (अस्कोट-आराकोट अभियान अंक, पहाड़) का स्वाद भूलने वाले नहीं हैं। उस दमदार लेखनी से दम साध कर कुछ धांसू चीजें लिख डालिए। हम झपट कर पढ़ने को तैयार बैठे हैं।
U got one more friend here…hope more from u…